कुंडली का फलकथन करने से पूर्व इन ज्योतिषीय सूत्रों को ध्यान में रखकर फलादेश करना चाहिए :- किसी भी ग्रह की महादशा में उसी ग्रह की अन्तर्दशा अनुकूल फल नहीं देती। योगकारक ग्रह (केन्द्र और त्रकोण का स्वामी ग्रह) की… Continue Reading…

जन्मकुंडली में ग्रहों से बनने वाले योग और दुर्योग… यदि लग्न पर सूर्य मंगल की दृष्टि हो तो और उस पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो लग्न पर तो ऐसे जातकों को जानवर से भय हो सकता है… Continue Reading…

जन्म कुंडली मे बनने वाले पंच महापुरुष राजयोग और उनके प्रभाव । यदि मंगल मेष,वृश्चिक, या मकर राशि का होकर केंद्र में बैठे हो तो रूचक नामक महापुरुष राजयोग का निर्माण होता है।। यदि बुध कुंडली मे कन्या या मिथुन… Continue Reading…

कुंडली मे सन्तान प्राप्ति का विचार…. यदि लग्न से पांचवे भाव का स्वामी या चन्द्रमा से पांचवे स्थान का स्वामी और बृहस्पति अच्छे स्थानों में बैठे और पंचम भाव पर पंचमेश की तथा शुभ ग्रहों की दृष्टि हो और छठे… Continue Reading…

जैसा कि हम जान चुके हैं। कि कुंडली में 12 घर होते हैं और प्रत्येक घर को अलग-अलग कार्य क्षेत्रों में बांटा गया है। महर्षि पाराशर जी के मतानुसार आज हम कुंडली के लग्न आदि द्वादश भाव की परिकल्पना को… Continue Reading…

किसी भी कुंडली की मजबूती के लिए लग्न स्वामी अथवा लग्नेश का मजबूत होना ज़रूरी होता हैं लग्नेश का 3,6,8,12 भावो मे होना अशुभ माना जाता हैं क्यूंकी यह भाव हमेशा अशुभता प्रदान करते हैं लग्नेश भले ही पाप ग्रह… Continue Reading…

किसी व्यक्ति की संपत्ति का विश्लेषण करने के लिए कुंडली के चतुर्थ भाव का अध्ययन किया जाता है। चतुर्थ भाव अचल और चल संपत्तियों का मुख्य भाव है। इसी भाव से संपत्ति की खरीद और बिक्री दोनों को देखा जा… Continue Reading…

भाग्य का चमत्कार चाहिए तो कुंडली का नौवां भाव देखें, चमक उठेगा भाग्य जन्मकुंडली में नवम भाव भाग्य-धर्म-यश का है। इस भाव का स्वामी किस भाव में किस स्थिति, किन ग्रहों के साथ या दृष्ट है। उच्च का है या… Continue Reading…

जन्मकुंडली में मेष लग्न वालों के लिए अच्छे और बुरे योग 1..यदि मेष लग्न हो और चतुर्थेश तथा पंचमेश का सम्बन्ध हो तो राजयोग होता हैचतुर्थ का स्वामी चन्द्रमा और पंचम का स्वामी सूर्य होने के कारणसूर्य और चन्द्रमा का… Continue Reading…

जितना आपने इधर-उधर फालतू के खर्चे करने हैं। उसकी जगह अच्छा है कि आप अपने लिए ऊर्जा, शक्ति, पुण्य तथा देवों की विशेष कृपा प्राप्त करें। कार्तिक के समान कोई माह नहीं है, सतयुग के समान कोई युग नहीं, वेद… Continue Reading…