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धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस……पूजन

पूजा का शुभ मुहूर्त

2 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 37 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक का है. वहीं वृषभ काल शाम 6.18 मिनट से रात 8.14 मिनट तक रहेगा.

इस दिन ही आपको यम के लिए एक चौमुखा दीपक अपने घर के बाहर जलाना चाहिए।

धनतेरस पूजा विधि

धनतेरस के दिन आप भगवान धन्वंतरि, कुबेर और महालक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति शुभ मुहूर्त में पूजा स्थान पर स्थापित करें।

कुबरे स्थिर धन के प्रतीक माने जाते हैं, इसलिए धनतेरस पर उनकी पूजा होती है। भगवान शिव से उनको धनपति का वरदान प्राप्त है,

इस वजह से पृथ्वी की संपूर्ण धन—संपदा के वे स्वामी हैं।

स्थापना के बाद क्रमश: देवी लक्ष्मी, कुबरे और धन्वंतरि को अक्षत्, धूप, रोली, चंदन, सुपारी, पान का पत्ता, नारियल आदि अर्पित करें। फिर इनके मंत्रों का उच्चारण करें।

कुबेर पूजा मंत्र 1माला

ओम श्रीं, ओम ह्रीं श्रीं, ओम ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:।

धन्वंतरि पूजा मंत्र

ओम धन्वंतरये नमः॥ 1 माला

दूसरा मंत्र: 1माला

ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:

अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोगनिवारणाय

त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप

श्री धनवन्तरि स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

श्री लक्ष्मी महामंत्र 11 माला

“ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।”

मंत्र उच्चारण के बाद घर की तिजोरी या लॉकर की पूजा करें। चांदी के लक्ष्मी-गणेश की भी पूजा कर सकते हैं।

फिर क्रमश: तीनों से धन, वैभव और आरोग्य की कामना करते हुए प्रार्थना करें।

माना जाता है कि भगवान धन्वन्तरि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान हाथ में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे. धन्वन्तरि देवताओं के वैद्य हैं.

यही वजह है कि धनतेरस के दिन अपनी सेहत की रक्षा और आरोग्य के लिए धन्वन्तरि देव की उपासना की जाती है.

इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है और धन सम्पन्नता के लिए कुबेर की पूजा की जाती है. इस दिन लोग मूल्यवान धातुओं का और नए बर्तनों व आभूषणों की खरीदारी करते हैं.

साल भर घर में धन का अभाव ना हो इसके लिए एक खास उपाय जरूर करें. धनतेरस के दिन धन-धान्य और समृद्धि के लिए चांदी खरीदना बहुत शुभ माना जाता है.

इस दिन छोटी ही सही चांदी की वस्तु जरूर खरीदें. इस चांदी की वस्तु को घर में पूजा स्थान पर रख दें. दीपावली के दिन इस वस्तु को मां लक्ष्मी को अर्पित करें.

दीपावली के अगले दिन इसको चावल के ढेर में डाल दें और इसे वहीं पर साल भर रहने दें. इससे आपके घर में धन की बिल्कुल भी समस्या नहीं होगी.

पूजा के अंत में लक्ष्मी जी की आरती, कुबेर की आरती और भगवान धन्वंतरि की आरती करें।

पूजा में चढ़ाए गए सुपारी को किसी पीले वस्त्र में बांधकर लॉकर में रख सकते हैं।

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